बिहार सरकार का यह काम तो वाक़ई शानदार है, वाक़ई/ रवीश कुमार

बिहार में छात्र की परीक्षा नहीं ली जाती है. परीक्षा की परीक्षा ली जाती है. छात्र सिर्फ़ फार्म भर कर छह-छह साल तमाशा देखते हैं. इस नई शिक्षा व्यवस्था के लिए नीतीश कुमार को नोबेल प्राइज़ मिलना चाहिए और सुशील मोदी को संयुक्त राष्ट्र का महासचिव बना देना चाहिए. कमाल का काम किया है दोनों …

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यूपी की गैंगरेप पीड़िता मेरे सामने जलाई गई, मैंने सब देखा- पुलिसवाले ने क्या-क्या किया?/ अरुण सिंह

“आह! वे लोग रात के अंधेरे में मृतक का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. यह संभव नहीं है.” हाथरस जाने के दौरान उस रात ये बात मैंने अपने कैमरामैन पवन कुमार के साथ कार में कही थी. कुछ ही घंटों बाद, मुझे यकीन नहीं हो रहा था, जो मैं वहां देख रहा था. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के …

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आज भी प्रासंगिक है जतिन दास की शहादत / प्रबल सरन अग्रवाल

अपने दौर के सबसे प्रसिद्ध राजनैतिक बंदी, भगत सिंह के साथी, 63 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल के बाद अपनी जान देने वाले क्रांतिकारी जतिन दास (उर्फ़ यतीन्द्रनाथ दास) की शहादत आज 91 साल बाद भी उतनी ही प्रासंगिक है। जतिन-दा ने राजनैतिक बंदियों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपनी जान दी लेकिन आज …

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क़िस्सा दो मुक़दमों का: 1929 का मेरठ षड्यंत्र और दिल्ली दंगों की एफआईआर 59/2020

शाहरुख़ आलम दिल्ली दंगों की जांच करने वाली एजेंसियों ने कोरोना महामारी के समय में भी बिना कोई समझौता किए बहुत काम किया है. मुझे लगता है कि उनके पास अपने परिवारों के लिए शायद ही समय रहा होगा, और किन्हीं मिसालों को सुनने-जानने के लिए तो शायद बिल्कुल न हो. फिर भी अगर मुझे एक तारीख़ी …

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पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं/रवीश कुमार

आज जीडीपी के आंकड़े आए हैं. भारत की किसी भी पीढ़ी ने ये आंकड़े नहीं देखे होंगे. 5 अगस्त को नए भारत के उदय के बाद इन आंकड़ों ने रंग में भंग डाल दिया है. इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही की जीडीपी -23.9 प्रतिशत आई है. सावधान हो जाएं. आर्थिक निर्णय सोच समझ कर …

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‘देल्ही रॉयट्स 2020’ के लेखकों के ब्लूम्सबरी से किताब छपवाने की वजह क्या थी? / सिद्धार्थ भाटिया

कुछ लेखकों और टिप्पणीकारों की यह शिकायत कि ब्लूम्सबरी से प्रकाशित एक किताब का मसला उठाने वाले लोग बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंट रहे हैं, विडंबनापूर्ण और हास्यास्पद है. ब्लूम्सबरी ने अपने यहां से प्रकाशित किताब देल्ही रॉयट्स 2020 : द अनटोल्ड स्टोरी को अपने ही लेखकों के विरोध के बाद वापस …

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कोर्ट का मान ट्वीट से नहीं, जजों के काम और उनके फ़ैसलों से घटता है: अरुण शौरी

BY द वायर स्टाफ नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को दो ट्वीट्स के चलते अदालत की अवमानना का दोषी ठहराए जाने और कोर्ट द्वारा इसके लिए सजा तय करने की बहस के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री, पत्रकार और लेखक अरुण शौरी ने कहा है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय किसी टिप्पणी से अपमानित होता है …

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क्या राम मंदिर की आड़ में अपनी विफलताएं छिपा रही है मोदी सरकार : सुभाष गाताडे

बीते दिनों जनाब उद्धव ठाकरे द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के प्रस्तावित भूमि पूजन को लेकर जो सुझाव दिया गया है, वह गौरतलब है. मालूम हो कि आयोजकों की तरफ से जिन लोगों को इसके लिए न्योता दिया गया है, उसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का नाम भी शामिल है, उसी संदर्भ में उन्होंने इस बात पर …

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दिल्ली दंगे: क्या इंसाफ का गला घोंटने के लिए केंद्र सरकार ‘गुजरात मॉडल’ अपना रही है? : आशीष खेतान

यह देखना अजीब है कि दिल्ली दंगों और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलनों से जुड़े मामलों के लिए केंद्र सरकार विशेष लोक अभियोजकों (स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर्स) के तौर पर अपनी पसंद के वकीलों को नियुक्त करने के लिए इस तरह से उत्सुक है. क्या केंद्र न्याय दिलाने के लिए ईमानदार और निष्पक्ष वकीलों को नियुक्त करना …

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पुलिस एनकाउंटर: ‘त्वरित न्याय’ के नाम पर अराजकता को स्वीकार्यता नहीं मिलनी चाहिए/ निर्मल चंद्र अस्थाना

हाल ही में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या और उसके पूर्व दो दशकों से भी ज्यादा समय से अनेक हत्याओं के अभियुक्त विकास दुबे की पुलिस ‘एनकाउंटर’ में हत्या ने एक बार फिर उस ‘लोकप्रिय’ प्रथा को सवालों के दायरे में ला खड़ा किया है, जिसमें पुलिस किसी को भी कानून से सजा दिलवाने के बजाय …

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